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वे नौ महीने: कà¥à¤¯à¤¾ करें, कà¥à¤¯à¤¾ न करें
किसी महिला को मां के दरà¥à¤œà¥‡ तक पहà¥à¤‚चाने वाले नौ महीने बेशकीमती होते हैं। इस बीच वह कà¥à¤¯à¤¾ सोचती है, कà¥à¤¯à¤¾ खाती है, कà¥à¤¯à¤¾ करती है, जैसी तमाम चीजें आनेवाले बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत और परà¥à¤¸à¤¨à¥ˆà¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ तय करती हैं...
ईशà¥à¤µà¤° हर जगह नहीं हो सकता, इसलिठउसने मां बनाई... यह कहावत जितनी सच है, उतना ही बड़ा सच यह à¤à¥€ है कि किसी महिला को मां के दरà¥à¤œà¥‡ तक पहà¥à¤‚चाने वाले नौ महीने बेशकीमती होते हैं। इन नौ महीनों में वह कà¥à¤¯à¤¾ सोचती है, कà¥à¤¯à¤¾ खाती है, कà¥à¤¯à¤¾ करती है, कà¥à¤¯à¤¾ पढ़ती है, ये तमाम चीजें मिलकर आनेवाले बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत और परà¥à¤¸à¤¨à¥ˆà¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ तय करती हैं। इन नौ महीनों को अचà¥à¤›à¥€ तरह पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करके कैसे मां à¤à¤• सेहतमंद जिंदगी को जीवन दे सकती है, à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से बात करके बता रही हैं पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का सिंह:
मां बनने की सही उमà¥à¤°
मां बनने के लिठ20-30 साल की उमà¥à¤° सबसे सही होती है, लेकिन आजकल बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में महिलाà¤à¤‚ करियर की वजह से 32-33 साल की उमà¥à¤° में मां बनना पसंद कर रही हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤ शà¥à¤°à¥‚ से ही किसी अचà¥à¤›à¥€ गाइनिकॉलजिसà¥à¤Ÿ की देखरेख में रहें। 35 साल के बाद बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करने से मां और बचà¥à¤šà¤¾, दोनों को दिकà¥à¤•तें आ सकती हैं। उमà¥à¤° बढ़ने के साथ महिलाओं में मेडिकल पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥à¤²à¤® जैसे कि हाइपरटेंशन, बà¥à¤²à¤¡à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°, डायबीटीज आदि की आशंका बढ़ जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने में परेशानी आने के अलावा बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत पर बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ में डाउंस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (मंगोल बेबी) हो सकता है, यानी बचà¥à¤šà¥‡ का मानसिक विकास गड़बड़ाने का खतरा होता है। डिलिवरी के वकà¥à¤¤ à¤à¥€ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकती है।
पहले से रहें तैयार
अगर आप बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤²à¤¾à¤¨ कर रही हैं तो कम-से-कम तीन-चार महीने पहले से शारीरिक और मानसिक तौर पर खà¥à¤¦ को तैयार करना शà¥à¤°à¥‚ कर दें। उसी के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• खानपान का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें, à¤à¤°à¤ªà¥‚र नींद लें और सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लेवल कम रखें। कोशिश करें कि सामानà¥à¤¯ से वजन न बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो, न बहà¥à¤¤ कम। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® और योगासन करें। इससे तन और मन, दोनों शांत रहेंगे और गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ में आसानी होगी।
पà¥à¤°à¥€-कंसेपà¥à¤¶à¤¨à¤² काउंसलिंग: गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने से पहले काउंसलिंग (पà¥à¤°à¥€-कंसेपà¥à¤¶à¤¨à¤² काउंसलिंग) कराना अचà¥à¤›à¤¾ रहता है। इसके लिठपति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों को डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाना चाहिà¤à¥¤ काउंसलिंग के अलावा डॉकà¥à¤Ÿà¤° पति-पतà¥à¤¨à¥€ के कà¥à¤› टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ करवाते हैं, जैसे कि बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ, शà¥à¤—र टेसà¥à¤Ÿ, हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ आदि। अगर माता-पिता को कोई बीमारी है तो इन टेसà¥à¤Ÿ में उसकी जानकारी मिल जाती है। मसलन, अगर पति आरà¤à¤š (Rh+) पॉजिटिव और पतà¥à¤¨à¥€ आरà¤à¤š नेगेटिव (Rh-) हो और दूसरा बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤²à¤¾à¤¨ कर रहे हों (पहले बचà¥à¤šà¥‡ को कोई दिकà¥à¤•त नहीं होगी) तो बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾, पीलिया या हाइडà¥à¤°à¥‰à¤ªà¥à¤¸ फिटालिस (बचà¥à¤šà¥‡ का शरीर सूजा और पानी à¤à¤°à¤¾) हो सकता है। पहले से जानकारी मिलने पर इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगाकर बचà¥à¤šà¥‡ को बीमारी से बचाया जा सकता है। पहले बचà¥à¤šà¥‡ को इस तरह की बीमारी अनीमिया, हाइपोथायरॉडिजà¥à¤®, कैलशियम की कमी जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के अलावा फैमिली में किसी बीमारी की हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ रही है तो पहले से जानकारी मिलने पर इलाज आसान होता है। थैलसीमिया से पीड़ित होने पर अबॉरà¥à¤¶à¤¨ कराना ही बेहतर रहता है। अगर बचà¥à¤šà¥‡ के लिठपहले से तैयार हैं तो उसके अचानक आ जाने का तनाव à¤à¥€ नहीं होगा।
बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत के लिठसबसे जरूरी कà¥à¤¯à¤¾ है, आगे जानें...
सेहतमंद मां यानी सेहतमंद बचà¥à¤šà¤¾
होनेवाली मां का वजन और सेहत अगर ठीक है तो बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ सेहतमंद होगा। मां में हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ कम नहीं होना चाहिठऔर बीà¤à¤®à¤†à¤ˆ 18.5 से कम नहीं होना चाहिà¤à¥¤ अगर मां कमजोर होगी तो पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान 20 किलो तक वजन बढ़ाना पड़ेगा। वैसे, पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान 12-13 किलो वजन बढ़ना सामानà¥à¤¯ माना जाता है। इसमें से बचà¥à¤šà¥‡ का वजन तीन-साढ़े तीन किलो तक ही होता है। बाकी कैलरी मां डिलिवरी और दूसरी जरूरत के वकà¥à¤¤ के लिठरिजरà¥à¤µ रखती है। दूध पिलाने के लिठà¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान ही मां कैलरी रिजरà¥à¤µ करती है। अगर मां का वजन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है तो उसे पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वजन बढ़ाने से बचना चाहिà¤à¥¤ वैसे पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के शà¥à¤°à¥‚ के कà¥à¤› महीनों में बचà¥à¤šà¥‡ की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ कम ही रहती है, जबकि बाद के महीनों में बचà¥à¤šà¤¾ तेजी से बढ़ता है। उस वकà¥à¤¤ मां को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कैलरी की जरूरत पड़ती है, इसलिठदूसरे और तीसरे टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में खाने पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें।
आ सकती हैं ये दिकà¥à¤•तें :
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी को तीन टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में बांटा जाता है :
1. 0-3 महीने: शà¥à¤°à¥‚ के तीन महीने काफी अहम होते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान मां के शरीर में काफी बदलाव होते हैं। शरीर इन बदलाव और बचà¥à¤šà¥‡ के साथ à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥à¤Ÿ कर रहा होता है। हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स के साथ-साथ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ, खाने के टेसà¥à¤Ÿ और सà¥à¤•िन में à¤à¥€ बदलाव आने लगते हैं। उसका मूड काफी तेजी से बनने-बिगड़ने लगता है। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• इस वकà¥à¤¤ पति को खासतौर पर पेशंस रखना चाहिठऔर पतà¥à¤¨à¥€ को सहारा देना चाहिà¤à¥¤ इस वकà¥à¤¤ अबॉरà¥à¤¶à¤¨ की आशंका à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥€à¤¡à¤¼ या रेडिà¤à¤¶à¤¨ वाली जगह पर जाने से बचें। इन तीन महीनों में बचà¥à¤šà¥‡ के अंग बनते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में खाने की मातà¥à¤°à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उसकी कà¥à¤µà¥‰à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस, मितली और उलटी की शिकायत à¤à¥€ सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ इसी वकà¥à¤¤ होती है। इस वजह से आमतौर पर महिला का वजन कम हो जाता है, इसलिठघबराà¤à¤‚ नहीं। à¤à¤¸à¥‡ में महिला को हर वह चीज खाने की सलाह दी जाती है, जो उसे पसंद आà¤à¥¤
मॉरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग सिकनेस से बचने के लिठनीबू पानी या अदरक की चाय पी सकती हैं। दिन à¤à¤° में चार या पांच बार तरल चीजें लें, जैसे कि छाछ, लैमोनिड, नीबू पानी, नारियल पानी, जूस व शेक आदि। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।
2. 3-6 महीने: आमतौर पर पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के सबसे आसान महीने होते हैं। इस वकà¥à¤¤ तक महिला का शरीर बदलावों के साथ à¤à¤¡à¤œà¤¸à¥à¤Ÿ कर चà¥à¤•ा होता है। सà¥à¤•िन गà¥à¤²à¥‹ करने लगती है। फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ा सकती हैं। इस वकà¥à¤¤ हेलà¥à¤¦à¥€ डाइट पर फोकस करना चाहिà¤à¥¤
3. 6-9 महीने: बचà¥à¤šà¥‡ का शरीर तेजी से बढ़ने लगता है, इसलिठकैलरी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लेनी चाहिà¤à¥¤ इन तीन महीनों में खाने पर काफी धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ पेट काफी बढ़ जाता है, इसलिठसांस लेने में दिकà¥à¤•त महसूस हो सकती है। पैरों में सूजन और कमजोरी आ सकती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक पैर लटकाकर न बैठें। किसी à¤à¥€ तेल से नीचे से ऊपर की ओर पैरों की मालिश कर सकती हैं। अगर लेटने के बाद à¤à¥€ सूजन बनी रहती है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। कई बार सà¥à¤•िन में सूखापन आने लगता है और ईचिंग बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिठसाफ-सफाई का पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें और अचà¥à¤›à¥€ कà¥à¤°à¥€à¤® लगाà¤à¤‚। सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤š मारà¥à¤•à¥à¤¸ पड़ने लगें तो नारियल तेल लगाना चाहिà¤à¥¤ फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न रखें, बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो सकती है।
मां के लिठकौन कौन से टेसà¥à¤Ÿ जरूरी हैं...जानें आगे
कौन-कौन से टेसà¥à¤Ÿ जरूरी
अगर पहले से गायनिकॉलजिसà¥à¤Ÿ से कंसलà¥à¤Ÿ नहीं कर रहे हैं तो पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी पता चलते ही किसी अचà¥à¤›à¥‡ गाइनिकॉलजिसà¥à¤Ÿ के पास रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कराà¤à¤‚। मां बननेवाली महिला की सेहत के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° टेसà¥à¤Ÿ कराते हैं, फिर à¤à¥€ हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨, कैलशियम, बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र, यूरिन और à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ टेसà¥à¤Ÿ जरूर कराना चाहिà¤à¥¤ ये हर तीन महीनों में कराठजाते हैं।
- कोई परेशानी नहीं हो तो अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड आमतौर पर तीन बार कराया जाता है। दूसरे महीने में बचà¥à¤šà¥‡ की धड़कन जानने के लिà¤, चौथे महीने में बचà¥à¤šà¥‡ का विकास देखने के लिठऔर आखिरी महीने में बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ देखकर डिलिवरी पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करने के लिà¤à¥¤ अगर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को जरूरी लगता है, तो वह बीच में à¤à¥€ अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड करा सकता है।
- मिरà¥à¤—ी, हाइपोथायरॉइड और थैलसीमिया के लिठà¤à¥€ जांच कराई जाती है। अगर पैरंटà¥à¤¸ में थैलसीमिया के लकà¥à¤·à¤£ होते हैं तो बचà¥à¤šà¥‡ के इससे पीड़ित होने की आशंका 25 फीसदी बढ़ जाती है। जांच में अगर बचà¥à¤šà¤¾ इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¡ पाया जाता है तो उसे अबॉरà¥à¤Ÿ करना ही बेहतर होता है।
- चौथे और पांचवें या पांचवें और छठे महीने में मां को टिटनेस का टीका लगाया जाता है।
- शà¥à¤°à¥‚ के तीन महीने में मंथली चेकअप काफी होता है। कोई परेशानी होने पर 15 दिनों में à¤à¥€ जांच की जाती है। बचà¥à¤šà¥‡ के 28 हफà¥à¤¤à¥‡ का होने पर दो हफà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤• बार चेकअप जरूरी होता है।
- सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ खà¥à¤¦ न कराà¤à¤‚। जब डॉकà¥à¤Ÿà¤° बताà¤, तà¤à¥€ सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ कराà¤à¤‚। हालांकि इससे बचà¥à¤šà¥‡ को कोई नà¥à¤•सान नहीं होता है लेकिन इस दौरान à¤à¤•à¥à¤¸-रे से जरूर बचना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये किरणें बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकती हैं।
डाइट का रखें खास खà¥à¤¯à¤¾à¤²
मां और बचà¥à¤šà¥‡, दोनों की सेहत काफी हद तक डाइट पर डिपेंड करती है। à¤à¤¸à¥‡ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और आयरन से à¤à¤°à¤ªà¥‚र चीजें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खानी चाहिठजैसे कि दालें, पनीर, अंडा, नॉनवेज, सोयाबीन, दूध, पनीर, दही, पालक, गà¥à¤¡à¤¼, अनार, चना, पोहा, मà¥à¤°à¤®à¥à¤°à¤¾ आदि। फल और हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खूब खाà¤à¤‚। शरीर में पानी की कमी बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं होनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि डिलिवरी के वकà¥à¤¤ काफी खून की जरूरत पड़ती है और बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ फà¥à¤²à¥‚इड में रहता है, इसलिठनीबू पानी, नारियल पानी, छाछ, जूस खूब पिà¤à¤‚। बचà¥à¤šà¥‡ के दिमाग के विकास के लिठओमेगा-3 और ओमेगा-6 बहà¥à¤¤ जरूरी हैं। फिश लिवर ऑयल, डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤«à¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸, हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और सरसों के तेल में ये अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में मिलते हैं।
-बचà¥à¤šà¥‡ को वही मिलता है, जो मां खाती है इसलिठदेर तक à¤à¥‚खी न रहें। खाने में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अंतर से à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ हो जाती है। बेबी का साइज बढ़ने के साथ सà¥à¤Ÿà¤®à¤• की कैपिसिटी कम हो जाती है, इसलिठथोड़ा-थोड़ा खाà¤à¤‚ लेकिन बार-बार खाà¤à¤‚। दिन में पांच बार खाना, तीन बार फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ और दो बार दूध जरूर पिà¤à¤‚।
-पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान किसी खास चीज को खाने का दिल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ करने लगता है। à¤à¤¸à¥‡ में किसी à¤à¤• ही चीज को खाने के बजाय बाकी चीजों को à¤à¥€ खाने में शामिल करें और वैरायटी का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
-तला और मसालेदार न खाà¤à¤‚। इनसे गैस, à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€, जलन हो सकती है। जो à¤à¥€ खाà¤à¤‚, फà¥à¤°à¥‡à¤¶ खाà¤à¤‚। बाहर के खाने से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा होता है।
-मदर हॉरà¥à¤²à¤¿à¤•à¥à¤¸ र बॉरà¥à¤¨à¤µà¤¿à¤Ÿà¤¾ आदि à¤à¥€ ले सकते हैं।
मां के लिठयोग और वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® à¤à¥€ जरूरी है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚...जानें आगे
à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और योग
गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ से पहले : बचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करने के साथ ही योग और पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® शà¥à¤°à¥‚ कर देना चाहिà¤à¥¤ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने से तीन-चार महीने पहले ही कपालà¤à¤¾à¤¤à¤¿ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, अगà¥à¤¨à¤¿à¤¸à¤¾à¤° कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, उरà¥à¤§à¥à¤µà¤¹à¤¸à¥à¤¤à¥‹à¤¤à¤¾à¤¨ आसन, उतà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤ªà¤¾à¤¦ आसन, सेतà¥à¤¬à¤‚ध आसन, पवनमà¥à¤•à¥à¤¤ आसन, à¤à¥à¤œà¤‚गासन, नौकासन, मंडूकासन और अनà¥à¤²à¥‹à¤®-विलोम व à¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¨à¤¿à¤•ा पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® शà¥à¤°à¥‚ कर दें। इससे गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने में आसानी होगी और शरीर के अंदरूनी हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को ताकत मिलेगी। साथ ही, हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स बैलेंस में आठजाà¤à¤‚गे। रोजाना आधे घंटे अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
पहले तीन महीनों में : गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के बाद à¤à¥€ ऊपर लिखे आसनों को करते रहें। साथ में हाथों की सूकà¥à¤·à¥à¤® कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚, ताड़ासन, तितली आसन और डीप बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग जैसे अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ à¤à¥€ करें। à¤à¤¸à¤¾ कोई अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं करें, जो पेट पर दबाव डालता हो।
तीसरे से छठे महीने तक : तीन महीने बाद थोड़ी-सी सà¥à¤ªà¥€à¤¡ बढ़ा सकते हैं। इन महीनों में कटिचकà¥à¤° आसन, पादोतà¥à¤¤à¤¾à¤¨ आसन, सेतà¥à¤¬à¤‚ध आसन, वजà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¨ और पैरों की सूकà¥à¤·à¥à¤® कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ कर सकते हैं। साथ ही, लेटकर तितली और साइकलिंग के साथ-साथ à¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® à¤à¥€ करें। रोजाना आधा घंटा वॉक करें। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का वकà¥à¤¤ बढ़ने के साथ-साथ सà¥à¤ªà¥€à¤¡ कम होती जाà¤à¤—ी। अचà¥à¤›à¥‡ जूते पहनकर ही वॉक करें, वरना गिरने का खतरा रहेगा। सà¥à¤µà¤¿à¤®à¤¿à¤‚ग à¤à¥€ कर सकती हैं।
आखिरी तीन महीनों में : डीप बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग, अनà¥à¤²à¥‹à¤®-विलोम जैसी कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ ही करें। अगर कोई दिकà¥à¤•त है तो अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ में उसके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• बदलाव कर लेना चाहिà¤à¥¤ वॉकिंग जारी रखें। घर के छोटे-मोटे काम à¤à¥€ करते रहें। लगातार सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहने से नॉरà¥à¤®à¤² डिलिवरी होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। लेकिन अगर पहले अबॉरà¥à¤¶à¤¨ हो चà¥à¤•ा है तो आराम करना ही बेहतर होता है।
नोट: ये अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कà¥à¤°à¤® सामानà¥à¤¯ जानकारी के लिठहै, लेकिन अगर किसी को डायबीटीज, बीपी, कमरदरà¥à¤¦, मोटापा जैसी दिकà¥à¤•त है तो उसी के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ में बदलाव किया जाना चाहिà¤à¥¤ जिस महिला का पहले अबॉरà¥à¤¶à¤¨ हो चà¥à¤•ा है या जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ नहीं करनी चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² वरà¥à¤•शॉप
आजकल पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² वरà¥à¤•शॉप और पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® काफी चलन में हैं। इनमें आनेवाले बचà¥à¤šà¥‡ के लिठपैरंटà¥à¤¸ को मानसिक, शारीरिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रूप से तैयार किया जाता है। खासतौर पर मेटà¥à¤°à¥‹ में रहनेवाली सिंगल परिवारों के लिठये कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤‚ काफी मददगार साबित होती हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डिलिवरी का विडियो दिखाया जाता है, बेबी के सामान और उसका खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखने के बारे में बताया जाता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से पहले, पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान और डिलिवरी के बाद à¤à¥€ ये वरà¥à¤•शॉप अटैंड की जा सकती हैं। à¤à¤¸à¤¾ ही 'इनफेंट सिदà¥à¤§à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®' चलानेवाली सिदà¥à¤§ समाधि योग से जà¥à¤¡à¤¼à¥€à¤‚ कोमल कà¥à¤µà¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• ये पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® बचà¥à¤šà¥‡ के फिजिकल, इमोशनल, सोशल और सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤šà¥à¤…ल डिवेलपमेंट में मदद करते हैं।
साइंटिफिक तरीके से डिजाइन किठगठइन पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®à¥à¤¸ में ऑडियोविजà¥à¤…ल और सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ मटीरियल के जरिठपैरंटà¥à¤¸ को जानकारी दी जाती है। पैरंटà¥à¤¸ बचà¥à¤šà¥‡ के नखरों और गà¥à¤¸à¥à¤¸à¥‡ को à¤à¥€ आसानी से हैंडल कर सकते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® ऑरà¥à¤—नाइज करने वाली संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं का दावा है कि इनसे बचà¥à¤šà¤¾ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ होता है, उसकी मेमरी बढ़ती है और वह बिना किसी दबाव के अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ में रहने लगता है। आमतौर पर पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² कोरà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में 10-15 कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤‚ होती हैं और फीस 8 से 15 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ तक होती है।
मà¥à¤¯à¥‚जिक और मंतà¥à¤°- इस दौरान गायतà¥à¤°à¥€ मंतà¥à¤° का जाप या सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ अचà¥à¤›à¤¾ होता है। वैसे, मारà¥à¤•ेट में तमाम सीडी हैं, जो पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर तैयार की गई हैं, जैसे कि गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार, मेडिटेशन इन पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, रिलैकà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग सीडी आदि।
अचà¥à¤›à¥€ किताबें पढ़ें : वॉट टॠà¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ वेन यू आर à¤à¤¸à¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग, जॉय ऑफ पैरंटिंग, यà¥à¤…र पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी वीक बाय वीक, पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी चाइलà¥à¤¡à¤¬à¤°à¥à¤¥ à¤à¤‚ड द नà¥à¤¯à¥‚बॉरà¥à¤¨, द पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी बà¥à¤•, द पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी जैसी कई किताबें मारà¥à¤•ेट में हैं, जो आपको पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ सारी जानकारी बेहतरीन तरीके से मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ कराती हैं। इनमें से कà¥à¤› किताबें हिंदी में à¤à¥€ आ चà¥à¤•ी हैं। वैसे, वॉट टà¥...को इस विषय की बेहतरीन किताबों में से माना जाता है।
पॉजिटिव सोचें : खà¥à¤¶à¤¨à¥à¤®à¤¾ वातावरण में रहें। जितना पॉजिटिव रहेंगी, बचà¥à¤šà¥‡ के लिठउतना ही अचà¥à¤›à¤¾ होगा। बचà¥à¤šà¤¾ मां के गरà¥à¤ से ही चीजों को जानने-समà¤à¤¨à¥‡ लगता है और उसी वकà¥à¤¤ उसमें संसà¥à¤•ार पड़ने लगते हैं। मन में यह संशय न डालें कि बेटा होगा या बेटी। इससे बचà¥à¤šà¥‡ की शकà¥à¤¤à¤¿ कम होगी। इमोशंस पर कंटà¥à¤°à¥‹à¤² के साथ ही मेंटली à¤à¥€ रिलैकà¥à¤¸ रहें। बचà¥à¤šà¥‡ को विजà¥à¤…लाइज करें कि आप अपना बचà¥à¤šà¤¾ कैसा चाहती हैं। उससे बात करें। यह कमà¥à¤¯à¥‚निकेशन आपके और बचà¥à¤šà¥‡ के बीच में बंधन का काम करेगी। ये पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® हमारी माइथॉलजी पर आधारित होते हैं और साइंटिफिकली अà¤à¥€ तक इनकी सतà¥à¤¯à¤¤à¤¾ साबित नहीं हà¥à¤ˆ है।
आगे कà¥à¤²à¤¿à¤• करें और जानें कि कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ सावधानियां बरतें...
ये सावधानियां बरतें
- à¤à¤¾à¤°à¥€ वजन न उठाà¤à¤‚
- जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ डांस न करें
- सीढ़ियां नहीं फांदें
- हील न पहनें
- जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤¿à¤‚ग न करें
- लंबी यातà¥à¤°à¤¾ न करें
- रसà¥à¤¸à¥€ न कूदें
- कमर से à¤à¥à¤•ने के बजाय घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ मोड़कर बैठें
- बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह कोई दवा न लें
सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग और शराब का असर
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग और डà¥à¤°à¤¿à¤‚किंग से बचना चाहिà¤à¥¤ अलà¥à¤•ोहल से बचà¥à¤šà¥‡ के लिवर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है। वकà¥à¤¤ से पहले डिलिवरी à¤à¥€ हो सकती है। बचà¥à¤šà¥‡ का साइज छोटा हो सकता है और बचà¥à¤šà¥‡ की सही गà¥à¤°à¥‹à¤¥ नहीं होगी। सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग से पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤‚टा सिकà¥à¤¡à¤¼ सकता है, जिससे बचà¥à¤šà¥‡ को पूरा खाना और हवा नहीं मिल पाà¤à¤—ी।
मिसकैरेज की वजहें
आमतौर पर मिसकैरेज की मेडिकल वजहें होती है मसलन, जिनेटिक वजहें, पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤‚टा की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, वेजाइना में लगातार इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨, डायबीटीज की वजह से होनेवाला इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨, गलत मेडिसिन खाना आदि। पहले टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में होनेवाले 90 फीसदी मिसकैरेज जिनेटिक वजहों से होते हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उछल-कूद, डांस, दूसरे बचà¥à¤šà¥‡ का बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ आना à¤à¥€ मिसकैरेज की वजह बन सकता है। à¤à¤• बार मिसकैरेज होने पर तीन महीने बाद ही गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करें।
हाई रिसà¥à¤• पà¥à¤°à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी
डायबीटीज
मां बनने जा रही महिलाओं के लिठडायबीटीज बड़ी पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥à¤²à¤® हो सकती है। जो पहले से डायबीटीज से पीड़ित हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤—र लेवल नॉरà¥à¤®à¤² (खाली पेट शà¥à¤—र 95 से कम और खाने के बाद 130 से कम) आने पर गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करना चाहिà¤à¥¤ जिन महिलाओं के पैरंटà¥à¤¸ को शà¥à¤—र की हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ रही है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करने से लेकर डिलिवरी तक खासतौर पर सचेत रहना चाहिà¤à¥¤
जसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबीटीज : नॉरà¥à¤®à¤² पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में à¤à¥€ इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ 15 फीसदी कम हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में सेहतमंद महिलाओं में à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के वकà¥à¤¤ डायबीटीज (जसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबीटीज) होने के मामले बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में सामने आ रहे हैं। बहà¥à¤¤ सारे मामलों में चार हफà¥à¤¤à¥‡ बाद ही पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी और डायबीटीज दोनों का पता चलता है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•सान होने की आशंका होती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में ही बचà¥à¤šà¥‡ के अंग बनते हैं, इसीलिठपà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करना हमेशा बेहतर रहता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान शà¥à¤—र कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सेकंड या थरà¥à¤¡ टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में शà¥à¤—र जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है तो बचà¥à¤šà¥‡ का साइज बड़ा हो सकता है, जिसकी वजह से सिजेरियन करना पड़ सकता है।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में हमेशा इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ ही लें। गोलियां बिलà¥à¤•à¥à¤² न लें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनसे बचà¥à¤šà¥‡ में डिफेकà¥à¤Ÿ आ सकता है। पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान होनेवाले डायबीटीज के 90 फीसदी मामलों में डिलिवरी के बाद यह समसà¥à¤¯à¤¾ खतà¥à¤® हो जाती है। हालांकि अगर वजन कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में न रखा जाठतो à¤à¤¸à¥‡ 40 फीसदी में चार साल के अंदर महिला को डायबीटीज हो जाती है।
नोट: शà¥à¤—र की मरीज महिलाà¤à¤‚ वजन और शà¥à¤—र लेवल कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में रखें, आराम करें और खाने का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ खाने को मीठा बनाने के लिठसà¥à¤ªà¤¾à¤°à¤Ÿà¤® का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं। बचà¥à¤šà¥‡ को अपना दूध जरूर पिलाà¤à¤‚, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥à¤› लोगों को गलतफहमी होती है कि डायबीटिक मांओं को बचà¥à¤šà¥‡ को अपना दूध नहीं पिलाना चाहिà¤à¥¤
हाइपरटेंशन
अगर मां को हाइपरटेंशन है तो बचà¥à¤šà¥‡ की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ कम हो सकती है और वह काफी कमजोर हो सकता है। पà¥à¤°à¥€-मचà¥à¤¯à¥‹à¤° डिलिवरी की आशंका à¤à¥€ बढ़ जाती है।
हाइपोथायरॉडिजà¥à¤®: हाइपर और हाइपो, दोनों तरह के थायरॉडिजà¥à¤® में बचà¥à¤šà¥‡ के मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
जॉनà¥à¤¡à¤¿à¤¸: अगर मां को पीलिया है तो डिलिवरी से पहले ही बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ केस में डिलिवरी हमेशा अचà¥à¤›à¥‡ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में ही कराà¤à¤‚।
अबॉरà¥à¤¶à¤¨ और सिजेरियन: अगर पहले अबॉरà¥à¤¶à¤¨ हो चà¥à¤•ा है या पहला बचà¥à¤šà¤¾ सिजेरियन है तो à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी हाई रिसà¥à¤• कैटिगरी में आती है। à¤à¤¸à¥‡ मामलों में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बीच अचà¥à¤›à¤¾ गैप रखें।
पर कà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में सेकà¥à¤¸ सेफ है...आगे कà¥à¤²à¤¿ कर जानें
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी और सेकà¥à¤¸
- पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान महिलाà¤à¤‚ काफी इमोशनल और संवेदनशील हो जाती हैं। अगर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगता है कि उनका हसà¥à¤¬à¥ˆà¤‚ड उन पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं दे रहा, तो वे चिड़चिड़ी, अनिदà¥à¤°à¤¾ की शिकार और कम या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥‚ख की मरीज हो जाती हैं। उनकी सेकà¥à¤¸ की इचà¥à¤›à¤¾ कम हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में पति पà¥à¤¯à¤¾à¤° से पेश आठऔर पतà¥à¤¨à¥€ जिन बदलावों से गà¥à¤œà¤° रही है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¥‡à¥¤
- पहले तीन महीनों और आखिरी तीन महीनों में सेकà¥à¤¸ से बचें। कोई दिकà¥à¤•त न हो तो सेकंड टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° में शारीरिक संबंध बना सकती हैं, लेकिन इस दौरान पोजिशन का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें और देखें कि पेट पर किसी तरह का दबाव न पड़े।
- पà¥à¤°à¥à¤· को ऊपर नहीं रहना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ में महिला को ऊपर रहने की सलाह दी जाती है या फिर दोनों सिटिंग पोजिशन में à¤à¥€ आ सकते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ कहता है आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• महिला का रिपà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® हीट ओरिà¤à¤‚टेड है, इसलिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को गरà¥à¤® तासीर की चीजें जैसे कि सौंठ, अदरक, गरà¥à¤® मसाला, धनिया, मिरà¥à¤š, केसर, नॉन-वेज जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं खाना चाहिà¤à¥¤ जैसे-जैसे बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर के हिसà¥à¤¸à¥‡ बनने शà¥à¤°à¥‚ होते हैं, महिला में बदलाव आने लगते हैं। हारà¥à¤®à¥‹à¤‚स बदलने से वह कà¥à¤› खास चीजें खानी की इचà¥à¤›à¤¾ जताती है लेकिन कोशिश करें कि वात, पितà¥à¤¤ और कफ का बैलेंस बनाठरखें। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के पहले तीन महीनों में पपीता कम खाने की सलाह देता है। लेकिन à¤à¤²à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° इससे इतà¥à¤¤à¤«à¤¾à¤• नहीं रखते।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी और मिथ
-पपीता खाने से मिस कैरेज हो सकता है।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ इसे सही मानता है लेकिन कई डॉकà¥à¤Ÿà¤° इसे सही नहीं मानते। जबकि कà¥à¤›à¥‹ ने पपीते खाने से मिस कैरेज होने वाली बात को सही कहा। दरअसल, कचà¥à¤šà¥‡ पपीता में à¤à¤• à¤à¤‚जाइम होता है, जो जानवरों में अबॉरà¥à¤¶à¤¨ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है लेकिन इंसानों में अà¤à¥€ तक à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› पà¥à¤°à¥‚व नहीं हà¥à¤† है।
- मां को डायबीटीज है तो बचà¥à¤šà¥‡ को दूध नहीं पिलाना चाहिà¤à¥¤
बिलà¥à¤•à¥à¤² गलत है। मां को बचà¥à¤šà¥‡ को अपना दूध जरूर पिलाना चाहिà¤à¥¤
- गà¥à¤°à¤¹à¤£ के दौरान गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला घर से बाहर न निकले, चाकू आदि को हाथ न लगाठऔर कà¥à¤› न खाà¤à¥¤
गà¥à¤°à¤¹à¤£ के वकà¥à¤¤ पर कà¥à¤› किरणें बà¥à¤²à¥‰à¤• हो जाती हैं और कà¥à¤› अलग तरह की अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤µà¥‰à¤¯à¤²à¤Ÿ किरणें निकलती हैं, जिनसे लोग मानते हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•सान हो सकता है लेकिन अà¤à¥€ तक साइंटिफिकली गà¥à¤°à¤¹à¤£ का गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं पर कोई बà¥à¤°à¤¾ असर साबित नहीं हà¥à¤† है।
- बादाम, केसर, संतरा या नारियल खाने और नारियल पानी पीने से बचà¥à¤šà¤¾ गोरा होता है।
ये तमाम चीजें सà¥à¤•िन के लिठअचà¥à¤›à¥€ हैं, इसलिठइनसे बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤•िन à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ होती है, लेकिन गोरा होने का इनसे कोई तालà¥à¤²à¥à¤• नहीं है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें
-पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना कोई à¤à¥€ दवा न लें। पेनकिलर, à¤à¤‚टी-बायॉटिक, कफ सिरप जैसी दवाà¤à¤‚ कई बार लोग खà¥à¤¦ ही ले लेते हैं, जबकि à¤à¤¸à¤¾ बिलà¥à¤•à¥à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤
कपड़े कैसे पहनें
आजकल माकेरà¥à¤Ÿ में तमाम मैटरनिटी वेयर आ गठहैं। à¤à¤¸à¥‡ में आपके पास तमाम ऑपà¥à¤¶à¤¨ हो सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि कपड़े सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• à¤à¥€ हों। इस दौरान जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ टाइट कपड़े पहनने से बचें। वैसे, आजकल इतने खूबसूरत डà¥à¤°à¥‡à¤¸ माकेरà¥à¤Ÿ में उपलबà¥à¤§ हैं कि आप अपनी पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान बेहद खूबसूरत दिख सकती हैं और इस हसीन पलों को और à¤à¤‚जॉय कर सकती हैं।
इसके अलावा खास धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें इन बातों पर à¤à¥€...आगे कà¥à¤²à¤¿à¤• कर जानें
डॉ. मनोरमा सिंह, सीनियर कंसलà¥à¤Ÿà¤‚ट, गाइनिकॉलजी, मैकà¥à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤²
à¤à¤¡à¥à¤¸ -पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट महिला को अपना à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ टेसà¥à¤Ÿ जरूर कराना चाहिà¤à¥¤ अगर मां à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ पॉजिटिव है या उसे à¤à¤¡à¥à¤¸ है तो बचà¥à¤šà¥‡ के पॉडिटिव होने की à¤à¤•-तिहाई आशंका होती है। à¤à¤¸à¥€ महिलाओं को पूरी पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° की देखरेख में रहना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤› डॉकà¥à¤Ÿà¤° ये à¤à¥€ मानते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होने के बाद पॉजिटिव मां और बीमार हो सकती है। डिलिवरी से पहले मां को और बचà¥à¤šà¤¾ होते ही बचà¥à¤šà¥‡ को नेवरीपिन नाम की दवा की à¤à¤• डोज दी जाती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ पॉजिटिव होने की आशंका कà¥à¤› कम हो जाती है। à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ मां को बचà¥à¤šà¥‡ को अपना दूध नहीं पिलाना चाहिà¤à¥¤
अबॉरà¥à¤¶à¤¨- पहले तीन महीने तक सेफ रहता है, हालांकि 20 हफà¥à¤¤à¥‡ तक अबॉरà¥à¤¶à¤¨ कराना कानूनन जायज है। आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‡ या मां के किसी गंà¤à¥€à¤° बीमारी से पीडि़त होने पर ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° अबॉरà¥à¤¶à¤¨ की सलाह देते हैं। अबॉरà¥à¤¶à¤¨ दवा और ऑपरेशन, दोनों तरह से कराया जा सकता है। पहले 49 दिन तक डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर महिला अबॉरà¥à¤¶à¤¨ के लिठमेडिसन ले सकती लेकिन इसके बाद ऑपरेशन से अबॉरà¥à¤¶à¤¨ कराना ही सेफ रहता है। कई बार अबॉरà¥à¤¶à¤¨ के बाद गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने में दिकà¥à¤•त आ सकती है। अबॉरà¥à¤¶à¤¨ के दौरान इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होने या टà¥à¤¯à¥‚ब बà¥à¤²à¥‰à¤• होने पर à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
खाने में फैट से बचना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फैट होगा तो खाना पचाने में दिकà¥à¤•त होगी। बीपी à¤à¥€ बढ़ सकता है। इसके बजाय पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र डाइट लें। पपीता नहीं खाना चाहिà¤à¥¤ पहले तीन महीने में पपीता और अनानास दोनों नहीं खाना चाहिà¤à¥¤
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